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दायें से दो बाएं को पता ना चले | Inspirational Hindi Story of Family

Inspirational Family Story in Hindi
Inspirational Family Story in Hindi

शीना मॉडर्न ख्यालों की होने के बावजूद अपने संस्कारों को कभी भी नहीं भूली थी| शीना की माँ उसे तभी छोड़कर चली गयी थी जब वो बहुत छोटी थी| उसकी माँ के जाने से पहले वो उसे संस्कारों की पोटली थमा कर गयी थी| शीना को पहले से ही पता था कि जब वो ससुराल जायेगी तो उसे किन किन बातों का ध्यान रखना है|

उसके लिए कई रिश्ते आये लेकिन कहीं बात इसलिए पक्की ना हो सकी कि बिन माँ की लड़की है पता नहीं संस्कारी होगी भी या नहीं| शीना को बहुत बुरा लगता कि किसी लड़की की पहचान उसके साथ रह कर ही की जा सकती है ना कि इस आधार पर कि उसकी माँ इस दुनिया में नहीं है तो वो संस्कारी नहीं है|

शीना ने अब शादी के सपने देखना छोड़ दिया था उसे अब लगता था कि जो किस्मत में लिखा होगा वही हो कर रहेगा, बिना वजह चिंता करने से कुछ नहीं होगा| एक दिन उसकी सहेली रोज़ी के पापा उसके लिए रिश्ता लेकर आये| उनकी दूर की बहन का बेटा बड़े शहर में नौकरी करता था और बहुत ही संस्कारी भी था| रोज़ी शीना की अच्छी सहेली थी इसलिए उसके पिता उसकी खूबियों के बारे में अच्छे से जानते थे|

लड़के में कोई ऐब नहीं था और अच्छे पद पर नौकरी करता था ऐसा जान शीना के पिता ने रिश्ते के लिए हामी भर दी| लड़का लड़की एक दुसरे से मिले और दोनों ने एक दुसरे को पसंद कर लिया| रिश्ता पक्का हो गया और सगाई हो गयी| सगाई वाले दिन रोज़ी के पिता ने शारदा जी( शीना की होने वाली सास) को बुलाया और बोले- देखो दीदी मुझे नहीं पता कि शीना के पिता दान दहेज़ में क्या देंगे, कितना देंगे, बारातियों के लिए कैसा इंतजाम करेंगे मुझे कुछ नहीं पता लेकिन मैं एक चीज़ की तसल्ली आज तुम्हे ज़रूर देता हूँ कि शीना संस्कारों के मामले में तुम्हे मालामाल कर देगी|

शीना की माँ को गुज़रे काफी वक़्त हो गया है लेकिन मैं उसे बचपन से जानता हूँ, मरने से पहले ही उसकी माँ उसे संस्कारों से परिपूर्ण कर गयी थी| शारदा जी जानती थीं कि उनको क्या करना है, अगले दिन जब शीना के पिता का फ़ोन आया कि दहेज़ से जुडी कुछ बात करनी है तो शारदा जी ने कहा अभी रुकिए शादी पर देख लेंगे| शीना के पिता चिंतित हो गए कि जो काम करना है वो आज ही करके क्यूँ ना निपटाया जाए, कल किसने देखा|

अगले दिन शीना के पिता ने शारदा जी को फ़ोन करके अपने आने की सूचना दी और उनके घर पहुँच गए और बोले बहन जी मैं अपनी हैसियत अनुसार अपनी बेटी को जो दे सकता हूँ वो ज़रूर दूंगा पर जो काम समय रहते हो जाए वो अच्छा है| आप मुझे बता दीजिये आपको किस किस चीज़ की आवश्यकता है मैं उसका इंतजाम समय रहते कर देता हूँ| शीना की सास बोली- भाई साहब हमें कुछ नहीं चाहिए, बस आप अपनी बेटी को दो जोड़ी कपड़ों में भेज दीजिये, वो अब हमारी अमानत है| शीना के पिता के बहुत कहने पर भी उन्होंने दहेज़ लेने से मन कर दिया, धूमधाम से शादी हो गयी और शीना अपने ससुराल आ गयी| शीना काम काज में बहुत अच्छी थी और साथ ही साथ ऑफिस भी अच्छे से संभाल रही थी| कुछ दिनों बाद शीना की ननद की शादी हुई जो उम्र में उससे छोटी थी और उसके दिल के बहुत करीब थी| ऋतू शीना से अपने दिल की हर बात सांझा करती थी, शादी के कुछ दिनों बाद शीना के पास ऋतू का फ़ोन आया और वो रोने लगी तो ऋतू ने उसे अपने ऑफिस के पास वाले होटल में मिलने के लिए बुलाया|

शीना ने ऋतू की पूरी बात सुनी और उसे सब कुछ ठीक होने का आश्वासन देकर आ गयी| धीरे धीरे रवि( शीना के पति) ने देखा कि पहले शीना अपने छोटे मोटे खर्च के लिए ऑफिस की तनख्वाह से ही खर्चा करती थी लेकिन अब वो उन चीज़ों के लिए रवि पर निर्भर होती जा रही है| रवि के पूछने पर उसने कुछ सही से जवाब नहीं दिया| कुछ दिनों बाद रवि को बैंक में काम था और बैंक मेनेजर उसका दोस्त था तो रवि ने उससे इस बात का ज़िक्र किया|

रवि के दोस्त ने बताया कि हर महीने शीना की तनख्वाह का बड़ा हिस्सा किसी अकाउंट में ट्रान्सफर होता है, रवि वो अकाउंट नंबर नहीं जानता था| घर आने के बाद उसने शीना से इस बारे में बात की तो शीना टाल मटोल करने लगी जब रवि ने जिद की तो शीना ने बताया कि ऋतू के पति की नौकरी चली गयी थी और वो उन्हीं की तनख्वाह पर निर्भर थे तो मैंने ऋतू को यकीन दिलवाया कि मैं अपनी तनख्वाह का हिस्सा उन्हें देती रहूंगी जिससे उनकी हमारे परिवार में इज्ज़त भी बनी रहेगी और किसी को पता भी नहीं चलेगा|

शीना की सास कमरे बाहर से गुज़र कर मंदिर जा रही थी और ये सुनकर दंग रह गयीं| रवि ने कहा कि तुमने कुछ बताया क्यूँ नहीं तो शीना ने कहा कि

“दाए हाथ से दो तो बाएं हाथ को पता नहीं चलना चाहिए” ऐसामेरी माँ  कहा करती थीं| ये सुनते ही शारदा जी को विश्वास हो गया कि वाकई उन्होंने अपने भाई की बात मानकर बहुत अछे घर में रिश्ता किया है|

Written by Geetanjli Dua