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तनख्वाह|Emotional Father Daughter Story in Hindi

Emotional Father Daughter Hindi Story

Emotional Family Hindi Story
Emotional Family Hindi Story

शिखा ज़रा इधर आना कब से आवाज़ लगा रहा हूँ, सुनती ही नहींI शिवानी तुम भी तो आओ ना और बताओ क्या क्या मेनू रखना हैI भैया आप तो ऐसे चिंता कर रहे हैं जैसे सारा शहर बस आप ही की बेटी की शादी में खाना खाने आने वाला है- शिवानी( उनकी बहन) ने कहाI

हाँ भाई मेरी बेटी की शादी है तो सब कुछ लाजवाब होना चाहिए, एक ही तो ख्वाहिश थी मेरी कि मेरी बेटी जब इस घर से विदा हो तो ऐसे जाए कि लोग सालों साल याद रखें, पापा की बातें सुन शिखा कोने में खड़ी भावुक हो रही थी कि तभी पुनीत आया और बोला, दीदी आप यहाँ खड़े खड़े क्या सोच रही हो?

अपने हिस्से के गोल गप्पे नहीं बताओगी, बस तीखी पानी पूरी से मुझे ही परेशान करना था तुम्हे? शिखा सुन कर मुस्कुरा उठी लेकिन कहीं ना कहीं अन्दर से वो ये जानती थी कि पापा ने इस दिन के लिए अपनी कितनी ख्वाहिशों का गला घोंटा था, उसने देखा था पापा को रोज़ रोज़ तिल तिल मरते हुएI

शिखा वहां से अन्दर जाती है और शादी की तैयारियों में लग जाती है, वो अपनी बुआ के बहुत करीब थी क्यूंकि वो छोटी सी थी जब एक दुर्घटना में उसकी माँ की मृत्यु हो गयी थी, तब से उसकी बुआ ने ही उसे माँ जैसा प्यार दिया थाI बुआ(शिवानी) की शादी हुई थी लेकिन उनका बछा नहीं हो सकता था इसलिए ससुराल वालों ने उनका साथ नहीं दिया और उनके पति की मृत्यु के बाद उनसे रिश्ता ख़त्म कर लियाI शिवानी ने शिखा और पुनीत पर अपने बच्चों जैसी ममता ही लुटाई, बच्चे भी माँ सामान बुआ का बहुत आदर करते थेI

देखते देखते शादी का दिन आ गया और शिखा मन ही मन प्रार्थना कर रही थी कि बस सब कुछ अच्छा हो जाए और उसके पापा की मेहनत सकार्थ हो, उसके पापा ने सुबह से कुछ नहीं खाया था क्यूंकि जब तक बेटी की बिदाई नहीं हो जाती पिता उपवास रखता हैI शिखा जब तैयार होकर पारलर से आई तो उसकी सहेली ने कहा कुछ खा ले अभी बरात आने में टाइम है तो शिखा ने कहा- मेरे पापा भी तो सुबह से भूखे हैं,मुझे कुछ नहीं खानाI

शादी की रस्में शुरू हो गयी, कन्यादान की रस्म शुरू होने से पहले दूल्हा दुल्हन जब खाना खाने जाने लगे तो शिखा ने देखा कि उसके पापा के पास उसके ससुर जी और बहुत सारे ससुराल वाले खड़े हैंI उसने देखा कि उसके पापा चुपचाप मुह लटकाए हुए खड़े हैं, उसके कानों में जब आवाज़ गयी तो उसने सुना कि वो लोग उन्हें कह रहे थे कि इतना बुरा खाना उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में नहीं खाया और आज उनकी बिरादरी में इस वजह से नाक कट गयीI सब लोग खाना खाने के बाद कह रहे थे कि बहुत बुरा खाना था, शायद कैटरिंग के पैसे बचा लिए इन लोगों ने!!

शिखा को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ और वो तुरंत उस तरफ गयी और बोली, पापा आज चुप रहने का वक़्त नहीं हैI आप इन लोगों को बताते क्यूँ नहीं कि इस एक दावत के लिए आपने अपनी पूरी ज़िन्दगी की ”तनख्वाह” ,अपनी ख्वाहिशें सब दांव पर लगा दी, यहाँ तक कि हमारे जिद करने पर भी अपने ऊपर एक पैसे का खर्चा नहीं किया सिर्फ इसी लिए कि मेरी बेटी की शादी की दावत ऐसी हो कि हर कोई उसे याद रखेI

पंकज ने सब सुन लिया था और वो बोला शिखा तुम रहने दो किसी को सफाई देने की ज़रुरत नहीं हैI पंकज ने तरुण( अपने दोस्त) को आवाज़ दी और बोला कि यार खाना कैसा लगा तुझे तो वो बोला ऐसी दावत बहुत टाइम बाद खायी हैI

पंकज ने कहा, पापा आपको ऐसा नहीं करना चाहिए थाI आप ये क्यूँ नहीं समझते कि एक पिता अपना पूरा जीवन लगा देता है अपनी बेटी की शादी के लिए और वहां आने वाले लोग एक मिनट में फैसला कर देते हैं कि इन्होने खाना अच्छा सर्व नहीं कियाI जो पिता बच्ची की शादी के लिए पूरी ज़िन्दगी पाई पाई जोड़ता है क्या वो इस चीज़ में कंजूसी कर सकता है, पहली बात तो खाने में कोई कमी नहीं थी और दूसरा अगर कमी होती भी या कोई रिश्तेदार कुछ कहता भी है तो आपकी ये ज़िम्मेदारी बनती है कि आप उन हालातों को संभालें क्यूंकि ये अब आपके” समधी” हैं जिनसे आपका सम्बन्ध जुड़ा हैI

पंकज के पिताजी ने शिखा के पिताजी से माफ़ी मांगी और फिर कन्यादान की रस्म अदा करने के लिए कहा, शिखा के पिताजी को एहसास हो गया कि पंकज जैसा दामाद पाकर वो धन्य हो गए और वो शिखा को कभी भी बेईज्ज़त नहीं होने देगाI

Written by Geetanjli Dua