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ख़ामोशी ही बेहतर है|Emotional Family Story in Hindi

Family Hindi Story

Emotional Family Story in Hindi
Emotional Family Story in Hindi

अरे बहु देखो तो ज़रा तुम्हारी बहन आई है, इनकी अच्छे से खातिरदारी करो, कोई कमी नहीं रहनी चाहिए|

रीता की शादी को 1 साल होने को आया था लेकिन उसको अभी तक अपने मायके जाने का मौका नहीं मिल पाया था| जब भी वो मायके जाने का प्रोग्राम बनाती तभी कुछ न कुछ अड़चन आ जाती थी जिसकी वजह से वो मायके नहीं जा पायीI

आज उसकी दीदी उससे मिलने आ रही थी, माँ की मृत्यु के बाद उन्हीं ने उसको माँ का प्यार दिया था| दीदी रीता को बहुत प्यार करती थी पर वो अपने ससुराल में खुश रहे इसलिए कभी दखल अंदाजी नहीं की,कभी उसे मिलने भी नहीं गयीं| रीता के जीजाजी की एक मीटिंग थी जिसके सिलसिले में उन्हें उस इलाके में 2- 4 घंटे के लिए जाना था तो मीता( रीता की बहन) से सुन कर रहा नहीं गया और वो बोली मैं भी साथ चलूंगीI

मीता आज बहुत खुश थी आखिर अपनी छोटी बहन से जो मिलने जा रही थी इतने दिनों बाद पर अन्दर ही अन्दर सोच रही थी कि उसके ससुराल वाले कैसी प्रतिक्रिया देंगे| रीता सुबह से सारे काम निपटाने में लगी हुई थी और तभी उसे याद आया कि उसने राजीव को तो बताया ही नहीं|

हेल्लो राजीव, आज मीता दीदी आ रही है घर तो तुम थोडा जल्दी आ जाओगे? रीता की बात सुनकर राजीव थोडा चौंका और बोला अचानक, कैसे, सब ठीक तो है ना? हाँ, राजीव सब ठीक है बस जीजू को इधर कोई काम था तो दीदी ने कहा इसी बहाने वो मुझसे भी मिल लेंगी| ओह्ह अच्छा, लेकिन मेरी तो आज एक बहुत ज़रूरी मीटिंग है और मैं तुम्हे कॉल करने ही वाला था कि मेरा खाना मत बनाना, राजीव बोला|

राजीव दीदी 1 साल बाद मिल रही हैं और पहली बार आ रही हैं तो तुम्हें होना चाहिए| मैं जानता हूँ रीता पर अगर मुझे प्रोग्राम पहले पता होता तो शायद मैं छुट्टी ले सकता पर अब तो मैं फंस गया हूँ, फिर भी कोशिश ज़रूर करूँगा और अगर तुम्हें कुछ चाहिए हो तो जतिन( छोटा भाई ) उसको बोल देना वो ला देगा| रीता समझ चुकी थी कि शायद अचानक से बने प्रोग्राम की वजह से राजीव खुश नहीं हैं पर उसने कुछ नहीं कहा और फ़ोन रख दिया|

रीता दीदी के पसंद के राजमा चावल बनाना चाहती थी लेकिन राजमा ख़त्म थे तो उसने जतिन को कहा पास वाली दुकान से लाने के लिए और जतिन ने लाकर दे दिए| रीता ने जब राजमा बना लिए तो देखा दही भी ख़त्म है और बिना रायते के तो राजमा चावल अच्छे नहीं लगेंगे तो जैसे ही उसने जतिन को आवाज़ लगायी तो पता चला वो अपने दोस्त के घर जा चुका था| रीता को अब अपनी लाचारी पर बहुत अफ़सोस हुआ पर दीदी के आने की ख़ुशी ज्यादा थी इसलिए उसने जो कुछ सामान था उसी की तैय्यारी की और पकवान बना लिए| घंटी बजते ही रीता ने दरवाज़ा खोला तो दीदी को देखकर अपने आंसू नहीं रोक पायी और उसके गले लगकर खूब रोई| भला कोई मेहमान का ऐसा स्वागत करता है क्या? सास की आवाज़ सुन रीता ने आंसू पोंछे और दीदी को अन्दर ले गयी|

सासू माँ ने सबका हाल चाल लिया और अपने कमरे में चली गयी सोने के लिए, ससुर जी पहले ही ओपचारिकता निभा कर जा चुके थे| रीता अकेली थी अब अपनी बहन की आवभगत करने के लिए रीता अकेली थी, लेकिन उसने कोई कसर नहीं छोड़ी और खुश कर दिया दीदी को, जब रीता रसोई में बर्तन समेट रही थी तो मीता ने उससे पूछा तू खुश तो है ना?

हाँ दीदी बहुत खुश हूँ, आप बताओ ऐसा क्यूँ पूछा? जानती है रीता मैंने तुझे कभी अपनी छोटी बहन नहीं समझा, हमेशा बेटी समझा और माँ बेटी के दिल में छुपी बात समझती है| रीता ने फ्रिज में रखी कुल्फी निकाली और बोली दीदी मैं खुश हूँ, वो तो बस मुझे लगा कि सबकी व्यस्तता के कारण आपकी आवभगत में कोई कमी नहीं रह जाए!

पगली, तू अगर खुश है तो मुझे और क्या चाहिए पर एक बात हमेशा याद रखना कि कभी कभी हम ऐसे हालातों में घिर जाते हैं कि उस समय खामोशी ही सबसे बेहतर विकल्प होता है| अब राजीव को कुछ मत कहना आने पर, अगर हमने पहले बता दिया होता तो शायद वो घर पर ही होता, अचानक से विचार बना इसलिए वो हमें मिल नहीं पाया पर अगली बार तेरे जीजू को भी साथ लेकर आउंगी|

चल अब कुल्फी खाने दे मुझे निकलना है फिर देर हो रही है कहते हुए मीता ने कुल्फी ख़तम की और रीता के सास ससुर से अलविदा लेकर जाने लगी तो रीता को बोली कि हमेशा एक नसीहत याद रखना माँ कहती थी

“एक चुप सौ को मात देती है “!!

Written by Geetanjli Dua